अडानी ने हिंडनबर्ग के प्रश्नों के दिए उत्तर, जानें 5 महत्वपूर्ण सवालों पर कंपनी के जवाब

24 जनवरी 2023 को प्रकाशित हिंडनबर्ग रिसर्च की रिपोर्ट ने उद्योग जगत में तहलका मचा दिया। अडानी इंटरप्राइजेज के शेयर…

hindinburg research24 जनवरी 2023 को प्रकाशित हिंडनबर्ग रिसर्च की रिपोर्ट ने उद्योग जगत में तहलका मचा दिया। अडानी इंटरप्राइजेज के शेयर तो गिर ही रहे हैं, अडानी की खुद की पॉजीशन लगातार गिर रही है। वह टॉप 20 अरबपतियों के लिस्ट से बाहर हो गए हैं। दरअसल, हिंडनबर्ग की रिपोर्ट में अडानी पर कई गंभीर आरोप तो लगाए ही गए हैं, वहीं कंपनी से 88 सवाल भी पूछे गए थे। शॉर्ट सेलर कंपनी यानी हिंडनबर्ग रिचर्स का कहना है रिपोर्ट पर अडानी की तरफ से लंबे समय बाद प्रतक्रिया मिली है लेकिन उसके 88 सवालों में से 62 सवालों के अभी तक जवाब नहीं मिले हैं। आइए जानते हैं रिपोर्ट के वह पांच महत्वपूर्ण प्रश्न, जिसका उत्तर अडानी की तरफ से क्या दिया गया?

hindinburg research 2प्रश्न 1.
हिंडनबर्ग रिसर्च ने रिपोर्ट में आरोप लगाया गया था कि अडानी समूह ने गौतम अडानी के भाई विनोद अडानी और उनकी भारत से बाहर की शेल कंपनियों के साथ अरबों डॉलर के संदिग्ध सौदे किए हैं। इसमें कहा गया कि इन सौदों की मदद से शेयरों और कंपनी के बहीखाता में हेराफेरी की गई। हिंडनबर्ग का कहना है कि उसने इस संबंध में कई सबूत भी प्रस्तुत किए हैं जिसमें विनोद अडानी द्वारा संचालित शेल कंपनियों का उपयोग स्टॉक पार्किंग अथवा स्टॉक हेरफेर या अडानी के लेखा-जोखा में गड़बड़ी पाई गई है।

हिंडनबर्ग का कहना है कि अडानी का मानना है कि इन कंपनियों से हुए ट्रांजैक्शंस में कई गड़बड़ी नहीं दिखती है। हालांकि शॉर्ट सेलर का कहना है कि इस मुद्दे पर अडानी की तरफ से कोई संतोषजनक जवाब नहीं दिया गया है और उन्होंने इसे विस्तार से बताने की कोशिश नहीं की।

हिंडनबर्ग ने कहा कि इस मामले में अडानी ने अजीब तर्क दिया कि विनोद अडानी, अदानी समूह से संबंधित पार्टी नहीं है और लेन-देन से संबंधित कोई खुलासा करने योग्य मामला नहीं बनता है। जबकि सच्चाई यह है कि विदेशी सेल कंपनियों ने अदानी समूह की संस्थाओं से अरबों अमेरिकी डॉलर के ट्रांजैक्शंस किए हैं।

प्रश्न 2.
शॉर्ट-सेलर की रिपोर्ट में मॉरीशस की एक इकाई से 253 मिलियन अमेरिकी डॉलर के ऋण का उल्लेख है। इस इकाई के निदेशक विनोद अडानी थे। रिपोर्ट में अडानी समूह के परिवार द्वारा चलाई जा रही मॉरीशस की एक कंपनी से 692.5 मिलियन अमेरिकी डॉलर के निवेश की बात भी कही गई है।

शॉर्ट सेलर ने बताया कि इस प्रश्न पर अडानी समूह की तरफ से जो प्रतिक्रिया मिली है, इसमें कहा गया है कि गौतम अडानी को पता नहीं था कि उनके भाई विनोद अडानी ने गौतम अडानी की कंपनियों को इतनी भारी रकम उधार क्यों दी? उन्हें यह भी नहीं पता था कि पैसा कहां से आया?

hindenburg research 2प्रश्न 3.
हिंडनबर्ग रिसर्च ने संदिग्ध विदेशी शेयर निवेशक संस्थाओं और अडानी प्रमोटरों के बीच हुई कई अनियमितताओं और कनेक्शनों पर सवाल उठाया। इसमें कहा गया कि क्या प्रमोटर होल्डिंग्स का पूरी तरह से खुलासा किया गया था?

शॉर्ट-सेलर ने कहा कि अडानी की प्रतिक्रिया ने दावा किया कि उसे यह नहीं पता है कि इसके सबसे बड़े पब्लिक होल्डर कौन हैं।

प्रश्न 4:
हिंडनबर्ग की रिपोर्ट में 2007 का सेबी का फैसला भी शामिल था, जिसमें कहा गया था कि अडानी के प्रमोटर्स ने अडानी एंटरप्राइजेज की पूर्ववर्ती इकाई एईएल के शेयरों में हेरफेर करके बाजार में जोड़तोड़ करने वाले केतन पारेख को सहायता की गई थी। हिंडनबर्ग ने पूछा कि अडानी अपने शेयरों में इस तरह के स्टॉक हेरफेर की व्याख्या कैसे करेंगे?

शॉर्ट-सेलर ने बताया कि अडानी ने बिना किसी स्पष्टीकरण के प्रश्न को गलत बतला दिया और यह कहा कि इस मामले को पहले ही सुलझा लिया गया था।

प्रश्न 5:
हिंडनबर्ग रिसर्च रिपोर्ट में साक्ष्य के साथ कहा गया था कि सेबी ने 1999 से 2005 के बीच अडानी के शेयरों में हेरफेर करने के लिए 70 से अधिक संस्थाओं और व्यक्तियों पर मुकदमा चलाया गया था, जिसमें अडानी के प्रमोटर भी शामिल थे। शॉर्ट-सेलर ने अडानी से स्पष्टीकरण मांगा कि क्यों उनकी सूचीबद्ध कंपनियां नियमित रूप से बाजार में हेरफेर और इसके आरोपों में शामिल थी?                                                                                                                           हिंडनबर्ग ने कहा कि अदानी समूह की तरफ से जो प्रतिक्रिया मिली, उसमें दावा किया गया कि उन्हें किसी भी संस्थाओं और व्यक्तियों के खिलाफ किसी भी तरह की कार्रवाई के बारे में जानकारी नहीं है और न ही इसके बारे में पता होना चाहिए।

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